रिश्तों के सारे मंज़र चुपचाप देखता हूँ
हाथों में सबके खंजर चुपचाप देखता हूँ
ज़िसमें पला है मेरे बचपन का लम्हा लम्हा
उज़डा हुआ सा वो घर चुपचाप देखता हूँ
धरता है कितने तोहमत* मुझपे वजूद मेरा
जब भी मैं दिल के अंदर चुपचाप देखता हूँ
ओढ़े हैं कई किरदार मैने दुनिया के
वो रहगुजर जो कभी मंजिल की ईब्दिता* हुआ करते थे
उसको मैं अब फलटकर चुपचाप देखता हूँ
[1.तोहमत= झूठे आरोप ]
[2.ईब्दिता= प्रारम्भिक ]

हाथों में सबके खंजर चुपचाप देखता हूँ
ज़िसमें पला है मेरे बचपन का लम्हा लम्हा
उज़डा हुआ सा वो घर चुपचाप देखता हूँ
धरता है कितने तोहमत* मुझपे वजूद मेरा
जब भी मैं दिल के अंदर चुपचाप देखता हूँ
ओढ़े हैं कई किरदार मैने दुनिया के
वो रहगुजर जो कभी मंजिल की ईब्दिता* हुआ करते थे
उसको मैं अब फलटकर चुपचाप देखता हूँ
[1.तोहमत= झूठे आरोप ]
[2.ईब्दिता= प्रारम्भिक ]
