Wednesday, July 24, 2019

"एक एहसान  कर दो
 मुझे बदनाम कर दो
 थम चुकी  सांसें
मुफलिसे भी बढ रही 
खत्म हो जाए ज़िन्दगी इससे
पहले  मोहब्बत  का एलान कर दो
एक एहसान  कर दो
मुझे बदनाम कर दो "||

Sunday, March 3, 2019

वजूद मेरा

 रिश्तों के  सारे  मंज़र  चुपचाप  देखता  हूँ
हाथों  में  सबके खंजर  चुपचाप  देखता  हूँ

ज़िसमें  पला  है  मेरे  बचपन  का  लम्हा  लम्हा
उज़डा  हुआ  सा  वो  घर  चुपचाप  देखता  हूँ

धरता  है  कितने  तोहमत*  मुझपे  वजूद मेरा
जब  भी  मैं  दिल  के  अंदर  चुपचाप  देखता  हूँ

ओढ़े हैं कई किरदार मैने दुनिया के
वो  रहगुजर जो कभी मंजिल  की  ईब्दिता* हुआ करते थे
उसको  मैं  अब  फलटकर  चुपचाप देखता हूँ

[1.तोहमत= झूठे आरोप ]
[2.ईब्दिता= प्रारम्भिक ]


Friday, March 1, 2019

हमको समुंदर का ख़ौफ़ न दो जनाब 
हमने हंसते गालों में भंवर देखे हैं

Wednesday, February 20, 2019

सपनों को सच कर दिखाएँ

एक नई सोच की ओर कदम बढ़ाएँ
हौसलों से अपने सपनों की ऊंचाइयों को छू कर दिखाएँ
जो आज तक सिमट कर रह गई थी
ख्यालों में उन सपनों को सच कर दिखाएँ


जब नाव जल में छोड़ दी
तूफ़ान में ही मोड़ दी
दे दी चुनौती सिंधु को
फिर धार क्या मझधार क्या

कह मृत्यु को वरदान ही
मरना लिया जब ठान ही
फिर जीत क्या फिर हार क्या

जब छोड़ दी सुख की कामना
आरंभ कर दी साधना
संघर्ष पथ पर बढ़ चले
पिर फूल क्या अंगार क्या

संसार का पी पी गरल
जब कर लिया मन को सरल
भगवान शंकर हो गए
फिर राख क्या श्रृंगार क्या ।

Tuesday, January 8, 2019

कोई दग़ा दे गया

दुनिया को क्या बताऊँ कि क्या दे गया मुझे,
रातों को जागने की सज़ा दे गया मुझे
कश्ती मेरी भँवर से निकल आई थी मगर,
साहिल पे लाके कोई दग़ा दे गया मुझे।                        

आज नहीं तो कल होगा

हर एक संकट का हल होगा, वो आज नहीं तो कल होगा माना कि है अंधेरा बहुत और चारों ओर नाकामी माना कि थक के टूट रहे और सफर अभी  दुरगामी है जीवन ...