Tuesday, November 21, 2017

सुना है बहुत मशहूर हो तुम

सुना है बहुत मशहूर हो तुम दिल बहलाने में
कभी तशरीफ लाओ हमारे गरीबखाने में।
यहाँ मंदिर में आरती 
मस्जिद से अजां की अवाजें आती हैं
मज़हब के नाम पर तलवारें तन जाती हैं।
मर चुकी है इन्सानियत जिन्दा इन इन्सानों में 
है दामन सबका मटमैला फिर भी
गर्व महसूस करते हैं खुद का धर्म बताने में।
कोशिश करके देख लो तुम भी
शायद ये गले लग मिल जाएं
हम भी कसर न छोड़ेंगे अब तुमको अजमाने में।
सुना है बहुत मशहूर हो तुम दिल बहलाने में
कभी तशरीफ लाओ हमारे गरीबखाने में

भटकता हुआ रही नहीं हूँ मैं

भटकता हुआ मैं राही नहीं हूँ
आगे बढ़कर मुझे अपनी मंजिल को पाना है।देख चट्टानों सी मुसीबतों कोना हिम्मत हारनी हैचीर कर इनका सीनामुझे अपनी राह जाना है।
बहुत दर्द भरा है सबके जीवन में आजकल
मैं मिटा तो नहीं सकता लेकिन
कम करने के इरादे से
मुझे सबको हँसाना है।
ख़त्म हो जाती है जहाँ
ख्वाहिशें दुनिया भर की
आज तक ना मिल पाया
ना जाने कहा वो पैमाना है।
भटकता हुआ रही नहीं हूँ मैं
आगे बढकर मुझे अपनी मंजिल को पाना है।
वक्त कहाँ है किसी के पास
की कोई दर्द सुने मेरा
मुझे ख़ामोशी से हर लफ्ज
सबके दिलों तक पहुंचाना है।
साथ देता है हर हाथ
जब सितारे बुलंद होते हैं
गर्दिशें हो जब
किस्मत में बेशुमार।अनजान लोगों में फिर
अपनों ने कहा पहचाना है
जहाँ मिले दौलत प्यार की
अब मुझे उस जहान तक जाना है।
भटकता हुआ रही नहीं हूँ मैं
आगे बढकर मुझे अपनी मंजिल को पाना है।

तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।

यूँ ही ख्यालों से न टकराओ
बेवजह न अपना समय गवाओं
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।
ये धरती तुम्हारी है, ये गगन तुम्हारा है
तुम्हारा हौसला ही तुम्हारा सहारा है,
छोड़ सोच परेशानियों की तुम जरा मुस्कुराओ
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढाओ।
बढ़ते वही जो चलते हैं
लगा दें जान तो पहाड़ भी हिलते हैं,
उठा लो हल अब मेहनत का
बंजर किसमत पर सफलता की फसल उगाओ,
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।
गिर जाओ जो राहों में
तो उठ खड़े तुम फिर होना,
मतलबी इस दुनिया में न मदद को
हाथ कभी तुम फैलाओ,
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।
वक़्त की आंधियां, दुःखों के तूफान
जो तुम्हें करें कभी परेशान या
फंस जाओ कभी जीवन के कीचड़ में
तो फिर तुम कमल बन खिल जाओ,
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।
मत कोसना किसी और को
गर हालात ये बदतर हो जाएं,
ये फल है तुम्हारे कर्मों का
कर नेक काम हालात हक़ में लाओ,
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।
है दूर सही पर है तो सही
कैसे मिल जाए जो खड़ा वहीं,
पाकर मुकाम अब अपना तुम
इस जग पर तुम छा जाओ,
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।

Saturday, February 11, 2017

फैसला जो भी हो मंजूर होना चाहिये ,
जंग हो या इश्क भरपूर  होना चाहिये ,
कट चुकी उम्र ज़िनकी पत्थर तोड़ते ,
अब तो उन्  हाथों  में कोहिनूर होना चाहिये ||

आज नहीं तो कल होगा

हर एक संकट का हल होगा, वो आज नहीं तो कल होगा माना कि है अंधेरा बहुत और चारों ओर नाकामी माना कि थक के टूट रहे और सफर अभी  दुरगामी है जीवन ...