Tuesday, March 27, 2018

मैं

“पराए आँसुओं से आँख को नम कर रहा हूँ मैं ,
भरोसा आजकल खुद पर भी कुछ कम कर रहा हूँ मैं ,
बड़ी मुश्किल से जागी थी ज़माने की निगाहों में ,
उसी उम्मीद के मरने का मातम कर रहा हूँ मैं ..!”
#drkv
इंसान का विकास इस बात पे निर्भर करता है
कि उसका सलाहकार कौन है य़ा
वो सलाह  किससे लेता है

दिल आखिर तू क्यूँ रोता है

जब  जब  दर्द  का  बादल  छाया
जब  ग़म  का  साया  लहराया
जब  आंसू  पलकों तक  आया
जब  यह  तनहा  दिल  घबराया
हमने  दिल  को  यह  समझाया
दिल  आखिर  तू  क्यूँ रोता  है
दुनिया  में यूँही  होता  है
यह  जो  गहरे  सन्नाटे  हैं
वक़्त  ने  सबको  ही  बांटे  हैं
थोडा  ग़म  है  सबका  किस्सा
थोड़ी धूप  है  सबका  हिस्सा
आँख  तेरी  बेकार  ही  नम  हैं
हर  पल  एक  नया  मौसम  है
क्यूँ तू  ऐसे  पल  खोता  है
दिल  आखिर  तू  क्यूँ रोता  है
#ZINDAGI_NA_MILEGI_Dobara
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मैं कोई मुल्क नहीं हूं




मैं कोई मुल्क नहीं हूं
कि जला दोगे मुझे
कोई दीवार नहीं हूं कि गिरा दोगे मुझे
कोई सरहद भी नहीं हूं कि मिटा दोगे मुझे
यह जो दुनिया का पुराना नक्शा
मेज पर तुमने बिछा रक्खा है
इसमें कावाक लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं
तुम मुझे इसमें कहा ढूंढते हो
मैं इक अरमान हूं दीवानों का
सख्त—जां ख्वाब हूं कुचले हुए इंसानों का
लूट जब हद से सिवा होती है
जुल्म जब हद से गुजर जाता है
मैं अचानक किसी कोने में नजर आता हूं
किसी सीने से उभर आता हूं मैं ||
#osh

Tuesday, November 21, 2017

सुना है बहुत मशहूर हो तुम

सुना है बहुत मशहूर हो तुम दिल बहलाने में
कभी तशरीफ लाओ हमारे गरीबखाने में।
यहाँ मंदिर में आरती 
मस्जिद से अजां की अवाजें आती हैं
मज़हब के नाम पर तलवारें तन जाती हैं।
मर चुकी है इन्सानियत जिन्दा इन इन्सानों में 
है दामन सबका मटमैला फिर भी
गर्व महसूस करते हैं खुद का धर्म बताने में।
कोशिश करके देख लो तुम भी
शायद ये गले लग मिल जाएं
हम भी कसर न छोड़ेंगे अब तुमको अजमाने में।
सुना है बहुत मशहूर हो तुम दिल बहलाने में
कभी तशरीफ लाओ हमारे गरीबखाने में

भटकता हुआ रही नहीं हूँ मैं

भटकता हुआ मैं राही नहीं हूँ
आगे बढ़कर मुझे अपनी मंजिल को पाना है।देख चट्टानों सी मुसीबतों कोना हिम्मत हारनी हैचीर कर इनका सीनामुझे अपनी राह जाना है।
बहुत दर्द भरा है सबके जीवन में आजकल
मैं मिटा तो नहीं सकता लेकिन
कम करने के इरादे से
मुझे सबको हँसाना है।
ख़त्म हो जाती है जहाँ
ख्वाहिशें दुनिया भर की
आज तक ना मिल पाया
ना जाने कहा वो पैमाना है।
भटकता हुआ रही नहीं हूँ मैं
आगे बढकर मुझे अपनी मंजिल को पाना है।
वक्त कहाँ है किसी के पास
की कोई दर्द सुने मेरा
मुझे ख़ामोशी से हर लफ्ज
सबके दिलों तक पहुंचाना है।
साथ देता है हर हाथ
जब सितारे बुलंद होते हैं
गर्दिशें हो जब
किस्मत में बेशुमार।अनजान लोगों में फिर
अपनों ने कहा पहचाना है
जहाँ मिले दौलत प्यार की
अब मुझे उस जहान तक जाना है।
भटकता हुआ रही नहीं हूँ मैं
आगे बढकर मुझे अपनी मंजिल को पाना है।

तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।

यूँ ही ख्यालों से न टकराओ
बेवजह न अपना समय गवाओं
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।
ये धरती तुम्हारी है, ये गगन तुम्हारा है
तुम्हारा हौसला ही तुम्हारा सहारा है,
छोड़ सोच परेशानियों की तुम जरा मुस्कुराओ
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढाओ।
बढ़ते वही जो चलते हैं
लगा दें जान तो पहाड़ भी हिलते हैं,
उठा लो हल अब मेहनत का
बंजर किसमत पर सफलता की फसल उगाओ,
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।
गिर जाओ जो राहों में
तो उठ खड़े तुम फिर होना,
मतलबी इस दुनिया में न मदद को
हाथ कभी तुम फैलाओ,
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।
वक़्त की आंधियां, दुःखों के तूफान
जो तुम्हें करें कभी परेशान या
फंस जाओ कभी जीवन के कीचड़ में
तो फिर तुम कमल बन खिल जाओ,
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।
मत कोसना किसी और को
गर हालात ये बदतर हो जाएं,
ये फल है तुम्हारे कर्मों का
कर नेक काम हालात हक़ में लाओ,
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।
है दूर सही पर है तो सही
कैसे मिल जाए जो खड़ा वहीं,
पाकर मुकाम अब अपना तुम
इस जग पर तुम छा जाओ,
मंजिल तो मिल ही जायेगी
तुम जरा अपने कदम तो बढ़ाओ।

आज नहीं तो कल होगा

हर एक संकट का हल होगा, वो आज नहीं तो कल होगा माना कि है अंधेरा बहुत और चारों ओर नाकामी माना कि थक के टूट रहे और सफर अभी  दुरगामी है जीवन ...